सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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राग भैरूं
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अथ राग भैरूं 25
(गायन समय प्रातः काल)
373. सतगुरु तथा नाम महिमा । त्रिताल
सतगुरु चरणां मस्तक धरणां, राम नाम कहि दुस्तर तिरणां ॥ टेक ॥
अठ सिधि नव निधि सहजैं पावै, अमर अभै पद सुख में आवै ॥ 1 ॥
भक्ति मुक्ति बैकुंठा जाइ, अमर लोक फल लेवै आइ ॥ 2 ॥
परम पदारथ मंगल चार, साहिब के सब भरे भंडार ॥ 3 ॥
नूर तेज है ज्योति अपार, दादू राता सिरजनहार ॥ 4 ॥
374. उत्तम ज्ञान स्मरण । चौताल
तन ही राम मन ही राम, राम हृदय रमि राखि ले ।
मनसा राम सकल परिपूरण, सहज सदा रस चाखि ले ॥ टेक ॥
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