सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग बसंत 24
371. परिचय । षड़ताल
मन मोहन मेरे मन ही मांहिं, कीजै सेवा अति तहाँ ॥ टेक ॥
तहँ पायो देव निरंजना, परगट भयो हरि यह तना ।
नैनन ही देखूं अघाइ, प्रगट्यो है हरि मेरे भाइ ॥ 1 ॥
मोहि कर नैनन की सैन देइ, प्राण मूंखि हरि मोर लेइ ।
तब उपजै मोकौं इहै बानि, निज निरखत हूँ सारंगपानि ॥ 2 ॥
अंकुर आदैं प्रगट्यो सोइ, बैन बाण तातें लागे मोहि ।
शरणै दादू रह्यो जाइ, हरि चरण दिखावै आप आइ ॥ 3 ॥
372. थकित निश्चल । मदन ताल
मतवाले पँचूं प्रेम पूर, निमष न इत उत जाहिं दूर ॥ टेक ॥
हरि रस माते दया दीन, राम रमत ह्वै रहे लीन ।
उलट अपूठे भये थीर, अमृत धारा पीवहिं नीर ॥ 1 ॥
सहज समाधि तज विकार, अविनाशी रस पीवहिं सार ।
थकित भये मिल महल मांहिं, मनसा वाचा आन नांहिं ॥ 2 ॥
मन मतवाला राम रंग, मिल आसण बैठे एक संग ।
सुस्थिर दादू एकै अंग, प्राणनाथ तहँ परमानन्द ॥ 3 ॥
इति राग बसंत सम्पूर्णः ॥ 24 ॥ पद 9 ॥
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