सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-कायाबेली ग्रंथ 23
काया माँही मुनिवर मेला, काया माँही आप अकेला ।
काया माँही जपिये जाप, काया माँही आपै आप ॥ 5 ॥
काया नगर निधान है, माँही कौतिक होइ ।
दादू सद्गुरु संग ले, भूल पड़े जनि कोइ ॥ 6 ॥
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रंगताल
काया माँही विषमी बाट, काया माँही औघट घाट।
काया माँही पट्टण गाँव, काया माँही उत्तम ठाँव ॥ 1 ॥
काया माँही मण्डप छाजै, काया माँही आप विराजै।
काया माँही महल आवास, काया माँही निश्चल बास ॥ 2 ॥
काया माँही राजद्वार, काया माँही बोलणहार।
काया माँही भरे भण्डार, काया माँही वस्तु अपार ॥ 3 ॥
काया माँही नौ निधि होइ, काया माँही अठ सिधि सोइ।
काया माँही हीरा साल, काया माँही निपजैं लाल ॥ 4 ॥
काया माँही माणिक भरे, काया माँही ले ले धरे।
काया माँही रत्न अमोल, काया माँही मोल न तोल ॥ 5 ॥
काया माँही कर्तार है, सो निधि जानै नाँहि।
दादू गुरुमुख पाइये, सब कुछ काया मांहि ॥ 6 ॥ -
वर्णभिन्न ताल
काया माँही सब कुछ जाण, काया मांहै लेहु पिछाण।
काया माँही बहु विस्तार, काया माँही अनन्त अपार ॥ 1 ॥
काया माँही अगम अगाध, काया माँही निपजे साध।
काया माँही कह्या न जाइ, काया माँही रहे ल्यौ लाइ ॥ 2 ॥
काया माँही साधन सार, काया माँही करे विचार।
काया माँही अमृत वाणी, काया माँही सारंग प्राणी ॥ 3 ॥
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