सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 461, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 461

श्री दादूवाणी-कायाबेली ग्रंथ 23
काया माँही खेलै प्राण, काया माँही पद निर्वाण।
काया माँही मूल गह रहै, काया मांही सब कुछ लहै ॥ 4 ॥
काया माँही निज निरधार, काया माँही अपरम्पार।
काया माँही सेवा करै, काया माँही नीझर झरै ॥ 5 ॥
काया माँही वास कर, रहै निरंतर छाइ।
दादू पाया आदि घर, सद्गुरु दिया दिखाइ ॥ 6 ॥
361. वर्ण भिन्न ताल
काया माँही अनुभै सार, काया माँही करै विचार।
काया माँही उपजै ज्ञान, काया माँही लागै ध्यान ॥ 1 ॥
काया माँही अमर स्थान, काया माँही आतमराम।
काया माँही कला अनेक, काया माँही कर्ता एक॥ 2 ॥
काया माँही लागै रंग, काया माँही सांई संग।
काया माँही सरवर तीर, काया माँही कोकिल कीर ॥ 3 ॥
काया माँही कच्छप नैन, काया माँही कूँजी बैन।
काया माँही कमल प्रकाश, काया माँही मधुकर वास ॥ 4 ॥
काया माँही नाद कुरंग, काया माँही ज्योति पतंग।
काया माँही चातक मोर, काया माँही चंद चकोर ॥ 5 ॥
काया माँही प्रीति कर, काया माँही सनेह।
काया माँही प्रेम रस, दादू गुरुमुख येह ॥ 6 ॥
362. राज विद्याधर ताल
काया माँही तारणहार, काया माँही उतरे पार।
काया माँही दुस्तर तारे, काया माँही आप उबारे ॥ 1 ॥
काया माँही दुस्तर तिरे, काया माँही होइ उद्धरे।
काया माँही निपजै आइ, काया माँही रहै समाइ ॥ 2 ॥

  • 461 -