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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 459, कुल 504 में से

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पृष्ठ 459

श्री दादूवाणी-कायाबेली ग्रंथ 23
काया माँही रात दिन, उदय अस्त इकतार।
दादू पाया परम गुरु, कीया एकंकार ॥ 6 ॥
357. त्रिताल
काया माँही खेल पसारा, काया माँही प्राण अधारा।
काया माँही अठारह भारा, काया माँही उपावनहारा ॥ 1 ॥
काया माँही सब वन राइ, काया माँही रहे घर छाइ।
काया माँही कंदलि वास, काया माँही है कैलास ॥ 2 ॥
काया माँही तरुवर छाया, काया माँही पंखी माया।
काया माँही आदि अनंत, काया माँही है भगवन्त ॥ 3 ॥
काया माँही त्रिभुवन राइ, काया माँही रहे समाइ।
काया माँही चौदह भुवन, काया माँही आवागवन ॥ 4 ॥
काया माँही सब ब्रह्मांड, काया माँही हैं नव खण्ड।
काया माँही स्वर्ग पयाल, काया माँही आप दयाल ॥ 5 ॥
काया माँही लोक सब, दादू दिये दिखाइ।
मनसा वाचा कर्मणा, गुरु बिन लख्या न जाइ ॥ 6 ॥
358.रंगताल
काया माँही सागर सात, काया माँही अविगत नाथ।
काया माँही नदिया नीर, काया माँही गहर गंभीर ॥ 1 ॥
काया माँही सरवर पाणी, काया माँही बसै बिनाणी।
काया माँही नीर निवान, काया माँही हंस सुजान ॥ 2 ॥
काया माँही गंग तरंग, काया माँही जमुना संग।
काया माँही है सरस्वती, काया माँही द्वारावती ॥ 3 ॥
काया माँही काशी स्थान, काया माँही करै स्नान।
काया माँही पूजा पाती, काया माँही तीर्थ जाती ॥ 4 ॥

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