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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 433, कुल 504 में से

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पृष्ठ 433

श्री दादूवाणी-राग सोरठ 19
रे तूँ ना कर मेरी मेरा, हरि राम बिना को तेरा ॥ 2 ॥
रे तूँ चेत न देखे अंधा, यहु माया मोह सब धंधा ।
रे काल मीच सिर जागे, हरि सुमिरण काहे न लागे ॥ 3 ॥
यहु औसर बहुरि न आवै, फिर मनिषा जन्म न पावै ।
अब दादू ढ़ील न कीजे, हरि राम भजन कर लीजे ॥ 4 ॥
३०२. प्रतिपाल
मन रे, देखत जन्म गयो, तातैं काज न कोई भयो रे ॥ टेक ॥
मन इंद्रिय ज्ञान विचारा, तातैं जन्म जुआ ज्यों हारा ।
मन झूठ साँच कर जानै, हरि साध कहैं, नहिं मानै ॥ 1 ॥
मन रे बादि गहे चतुराई, तातैं मनमुख बात बनाइ ।
मन आप आपको थापै, करता होइ बैठा आपै ॥ 2 ॥
मन स्वादी बहुत बनावै, मैं जान्या विषय बतावै ।
मन मांगै सोई दीजै, हमहिं राम दुखी क्यों कीजै ॥ 3 ॥
मन सबही छाड़ विकारा, प्राणी होइ गुणण तैं न्यारा ।
निर्गुण निज गहि रहिये, दादू साध कहैं, ते कहिये ॥ 4 ॥
३०३. प्रतिपाल
मन रे, अंतकाल दिन आया, तातैं यहु सब भया पराया ॥ टेक ॥
श्रवनों सुनै न नैनहुँ सूझै, रसना कह्या न जाई ।
शीश चरण कर कंपन लागे, सो दिन पहुँच्यो आई ॥ 1 ॥
काले धोले वरण पलटिया, तन मन का बल भागा ।
जौबन गया जरा चल आई, तब पछतावन लागा ॥ 2 ॥
आयु घटै घट छीजै काया, यहु तन भया पुराना ।
पाँचों थाके कह्या न मानैं, ताका मर्म न जाना ॥ 3 ॥
हंस बटाऊ प्राण पयाना, समझि देख मन मांहिं ।

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