सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16
282. भेष बिडंबन । ललित ताल
हम पाया, हम पाया रे भाई । भेष बनाय ऐसी मन आई ॥ टेक ॥
भीतर का यहु भेद न जानै, कहै सुहागिनी क्यों मन मानै ॥ 1 ॥
अंतर पीव सौं परिचय नाँहीं, भई सुहागिनी लोगन मांहीं ॥ 2 ॥
सांई स्वप्नै कबहुँ न आवै, कहबा ऐसे महल बुलावै ॥ 3 ॥
इन बातन मोहि अचरज आवै, पटम किये कैसे पीव पावै ॥ 4 ॥
दादू सुहागिनी ऐसे कोई, आपा मेट राम रत होई ॥ 5 ॥
283. आत्म समता । उत्सव ताल
ऐसे बाबा राम रमीजे, आतम सौं अंतर नहीं कीजे ॥ टेक ॥
जैसे आतम आपा लेखै, जीव जंतु ऐसे कर पेखै ॥ 1 ॥
एक राम ऐसे कर जानै, आपा पर अंतर नहिं आनै ॥ 2 ॥
सब घट आतम एक विचारे, राम सनेही प्राण हमारे ॥ 3 ॥
दादू साची राम सगाई, ऐसा भाव हमारे भाई ॥ 4 ॥
284. नाम समता । उत्सव ताल
माधइयो-माधइयो मीठो री माइ, माहवो-माहवो भेटियो आइ ॥ टेक ॥
कान्हइयो-कान्हइयो करता जाइ, केशवो केशवो केशवो धाइ ॥ 1 ॥
भूधरो भूधरो भूधरो भाइ, रमैयो रमैयो रह्यो समाइ ॥ 2 ॥
नरहरि नरहरि नरहरि राइ, गोविन्दो गोविन्दो दादू गाइ ॥ 3 ॥
285. समता । बसंत ताल
एकही एकै भया आनंद, एकही एकै भागे द्वन्द ॥ टेक ॥
एकही एकै एक समान, एकही एकै पद निर्वान ॥ 1 ॥
एकही एकै त्रिभुवन सार, एकही एकै अगम अपार ॥ 2 ॥
एकही एकै निर्भय होइ, एकही एकै काल न कोइ ॥ 3 ॥
एकही एकै घट प्रकास, एकही एकै निरंजन वास ॥ 4 ॥
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