सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 422, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 422

श्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16
279. त्रिताल
काहे रे बक मूल गँवावै, राम के नाम भलें सचु पावै ॥ टेक ॥
वाद विवाद न कीजे लोई, वाद विवाद न हरि रस होई ।
मैं मैं तेरी मांनै नाँहीं, मैं तैं मेट मिलै हरि मांहीं ॥ 1 ॥
हार जीत सौं हरि रस जाई, समझि देख मेरे मन भाई!
मूल न छाड़ी दादू बौरै, जनि भूलै तूँ बकबे औरै ॥ 2 ॥
२४०. (फारसी) त्रिताल
हुशियार हाकिम न्याव है, सांई के दीवान।
कुल का हिसाब होगा, समझ मुसलमान ॥ टेक ॥
नीयत नेकी सालिकां, रास्ता ईमान।
इखलास अंदर आपणे, रखणां सुबहान ॥ 1 ॥
हुक्म हाजिर होइ बाबा, मुसल्लम महरबान।
अक्ल सेती आपमां, शोध लेहु सुजान ॥ 2 ॥
हक सौं हजूरी हूँणां, देखणां कर ज्ञान।
दोस्त दाना दीन का, मनणां फरमान ॥ 3 ॥
गुस्सा हैवानी दूर कर, छाड़ दे अभिमान।
दुई दरोगां नांहिं खुशियाँ, दादू लेहु पिछान ॥ 4 ॥
२४1. साधु प्रति उपदेश (गुजराती) । ललित ताल
निर्पख रहणा, राम राम कहणा,
काम क्रोध में देह न दहणा ॥ टेक ॥
जेणें मारग संसार जाइला, तेणें प्राणी आप बहाइला ॥ 1 ॥
जे जे करणी जगत करीला, सो करणी संत दूर धरीला ॥ 2 ॥
जेणें पंथैं लोक राता, तेणें पंथैं साधु न जाता ॥ 3 ॥
राम नाम दादू ऐसें कहिये, राम रमत रामहि मिल रहिये ॥ 4 ॥

  • 422 -