सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16
एकही एकै आपहि आप, एकही एकै माइ न बाप ॥ 5 ॥
एकही एकै सहज स्वरूप, एकही एकै भये अनूप ॥ 6 ॥
एकही एकै अनत न जाइ, एकही एकै रह्या समाइ ॥ 7 ॥
एकही एकै भये लै लीन, एकही एकै दादू दीन ॥ 8 ॥
286. विनती । वसंत ताल
आदि है आदि अनादि मेरा, संसार सागर भक्ति भेरा ।
आदि है अंत है, अंत है आदि है, बिड़द तेरा ॥ टेक ॥
काल है झाल है, झाल है काल है, राखिले राखिले प्राण घेरा ।
जीव का जन्म का, जन्म का जीव का, आपही आपले भांन झेरा ॥ 1 ॥
मर्म का कर्म का, कर्म का मर्म का, आइबा जाइबा मेट फेरा ।
तार ले पार ले, पार ले तार ले, जीव सौं शिव है निकट नेरा ॥ 2 ॥
आत्मा राम है, राम है आत्मा, ज्योति है युक्ति सौं करो मेला ।
तेज है सेज है, सेज है तेज है, एक रस दादू खेल खेला ॥ 3 ॥
287. परिचय । कोकिल ताल
सुन्दर राम राया ।
परम ज्ञान परम ध्यान, परम प्राण आया ॥ टेक ॥
अकल सकल अति अनूप, छाया नहिं माया ।
निराकार निराधार, वार पार न पाया ॥ 1 ॥
गंभीर धीर निधि शरीर, निर्गुण निरकारा ।
अखिल अमर परम पुरुष, निर्मल निज सारा ॥ 2 ॥
परम नूर परम तेज, परम ज्योति प्रकाशा ।
परम पुंज परापरं, दादू निज दासा ॥ 3 ॥
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