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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग भवानी 14

२६१. (गुजराती) जलद त्रिताल
चरण देखाड़ तो प्रमाण ।
स्वामी माहरे नैणें निरखूं, मांगू येज मान ॥ टेक ॥
जोवूं तुझनें आशा मुझनें, लागूं येज ध्यान ।
वाहलो मारो मलो रे सहिये, आवे केवल ज्ञान ॥ 1 ॥
जेणी पेरें हूँ देखूं तुझने, मुझनें आलो जाण ।
पीव तणी हूँ पर नहिं जाणूं, दादू रे अजाण ॥ 2 ॥
२६२. (गुजराती) जलद त्रिताल
ते हरि मलू मारो नाथ !
जोवा ने मारो तन तपे, केवी पेरें पामूं साथ ॥ टेक ॥
ते कारण हूँ आकुल व्याकुल, ऊभी करूं विलाप ।
स्वामी मारो नैणें निरखूं, ते तणों मनें ताप ॥ 1 ॥
एक वार घर आवे वाहला, नव मेलूं कर हाथ।
ये वीनती सांभल स्वामी, दादू तारो दास ॥ 2 ॥
२६३. रंगताल
ते केम पामिये रे, दुर्लभ जे आधार।
ते बिना तारण को नहीं, केम उतरिये पार ॥ टेक ॥
केवी पेरें कीजे आपणो रे, तत्व ते छे सार ।
मन मनोरथ पूरे मारा, तन नो ताप निवार ॥ 1 ॥
संभान्यो आवे रे वाहला, वेला ये अवार।
विरहणी विलाप करे, तेम दादू मन विचार ॥ 2 ॥
इति राग भांणमली सम्पूर्णः ॥ 14 ॥ पद 4 ॥

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