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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 413

राग भवानी
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अथ राग भांणमली (भवानी) 14
(गायन समय मध्यरात्रि, राग मंजरी मतानुसार)
260. (गुजराती) विनती । कौव्वाली ताल
मारा वाल्हा रे ! तारे शरणि रहेश ।
बीनतड़ी वाल्हा नें कहतां, अनंत सुख लहेश ॥ टेक ॥
स्वामी तणों हूँ संग न मेलूं, बिनतड़ी कहेश ।
हूँ अबला तूँ बलवंत राजा, तारा बना वहेश ॥ 1 ॥
संग रहूँ तां सब सुख पामूं, अंतर थैं दहेश ।
दादू ऊपर दया करीनें, आवो एणढ़ वेश ॥ 2 ॥

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