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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 412

राग परजिया
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अथ राग परजिया (परज) 13
(गायन समय रात्रि 3 से 6)
259. परिचय । खेमटा ताल
नूर रह्या भरपूर, अमी रस पीजिये,
रस मांही रस होइ, लाहा लीजिये ॥ टेक ॥
प्रकट तेज अनन्त, पार नहिं पाइये ।
झिलमिल झिलमिल होइ, तहाँ मन लाइये ॥ 1 ॥
सहजैं सदा प्रकाश, ज्योति जल पूरिया ।
तहाँ रहें निज दास, सेवक सूरिया ॥ 2 ॥
सुख सागर वार न पार, हमारा वास है ।
हंस रहें ता मांहिं, दादू दास है ॥ 3 ॥
इति राग परजिया सम्पूर्णः ॥ 13 ॥ पद 1 ॥

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