सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
सींगी मुद्रा विभूति न कंथा, जटा जाप आसन नहिं पंथा ॥ 2 ॥
तीरथ व्रत न वनखंड वासा, मांग न खाइ नहीं जग आसा ॥ 3 ॥
अमर गुरु अविनाशी जोगी, दादू चेला महारस भोगी ॥ 4 ॥
230. उपदेश । भंग ताल
जोगिया बैरागी बाबा, रहै अकेला उनमनि लागा ॥ टेक ॥
आतम जोगी धीरज कंथा, निश्चल आसण आगम पंथा ॥ 1 ॥
सहजैं मुद्रा अलख अधारी, अनहद सींगी रहणि हमारी ॥ 2 ॥
काया वन-खंड पांचों चेला, ज्ञान गुफा में रहै अकेला ॥ 3 ॥
दादू दर्शन कारण जागे, निरंजन नगरी भिक्षा मांगे ॥ 4 ॥
231. समता ज्ञान । ललित ताल
बाबा, कहु दूजा क्यों कहिये, तातैं इहि संशय दुख सहिये ॥ टेक ॥
यहु मति ऐसी पशुवां जैसी, काहे चेतत नांहीं ।
अपना अंग आप नहिं जानै, देखै दर्पण मांही ॥ 1 ॥
इहि मति मीच मरण के तांई, कूप सिंह तहँ आया ।
डूब मुवा मन मरम न जाना, देखि आपनी छाया ॥ 2 ॥
मद के माते समझत नांहीं, मैगल की मति आई ।
आपै आप आप दुख दीया, देखी आपनी झांई ॥ 3 ॥
मन समझे तो दूजा नांहीं, बिन समझे दुख पावै ।
दादू ज्ञान गुरु का नांहीं, समझ कहाँ तैं आवै ॥ 4 ॥
232. ललित ताल
बाबा, नांहीं दूजा कोई ।
एक अनेक नाम तुम्हारे, मोपै और न होई ॥ टेक ॥
अलख इलाही एक तूँ, तूँ ही राम रहीम ।
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