सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
226. त्रिताल
रे मन मरणे कहा डराई, आगे पीछे मरणा रे भाई ॥ टेक ॥
जे कुछ आवै थिर न रहाई, देखत सबै चल्या जग जाई ॥ 1 ॥
पीर पैगम्बर किया पयाना, सेख मुसायक सबै समाना ॥ 2 ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश महाबलि, मोटे मुनि जन गये सबै चलि ॥ 3 ॥
निहचल सदा सोई मन लाइ, दादू हर्ष राम गुण गाइ ॥ 4 ॥
227. वस्तु निर्देश निर्णय । मल्लिका मोद ताल
ऐसा तत्त्व अनुपम भाई, मरै न जीवै, काल न खाई ॥ टेक ॥
पावक जरै न मार्यो मरई, काट्यो कटै न टार्यो टरई ॥ 1 ॥
आखिर खिरै न लागै काई, सीत घाम जल डूब न जाई ॥ 2 ॥
माटी मिलै न गगन विलाई, अघट एक रस रह्या समाई ॥ 3 ॥
ऐसा तत्त्व अनुपम कहिये, सो गहि दादू काहे न रहिये ॥ 4 ॥
228. मनोपदेश । मल्लिका मोद ताल
मन रे सेव निरंजन राई, ताको सेवो रे चित लाई ॥ टेक ॥
आदि अन्तै सोई उपावै, परलै लेहि छिपाई ।
बिन थँभा जिन गगन रहाया, सो रह्या सबन में समाई ॥ 1 ॥
पाताल मांही जे आराधै, वासुकि रे गुण गाई ।
सहस्त्र मुख जिह्वा द्वै ताके, सो भी पार न पाई ॥ 2 ॥
सुर नर जाको पार न पावैं, कोटि मुनि जन ध्याई ।
दादू रे तन ताको है रे, जाको सकल लोक आराही ॥ 3 ॥
229. जीव-उपदेश । भंग ताल
निरंजन जोगी जान ले चेला, सकल वियापी रहै अकेला ॥ टेक ॥
खपर न झोली डंड अधारी, मढ़ी न माया लेहु विचारी ॥ 1 ॥
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