सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
तूँ ही मालिक मोहना, केशव नाम करीम ॥ 1 ॥
सांई सिरजनहार तूँ, तूँ पावन तूँ पाक।
तूँ कायम करतार तूँ, तूँ हरि हाजिर आप ॥ 2 ॥
रमता राजिक एक तूँ, तूँ सारंग सुबहान ।
कादिर करता एक तूँ, तूँ साहिब सुलतान ॥ 3 ॥
अविगत अल्लह एक तूँ, गनी गुसांई एक।
अजब अनुपम आप है, दादू नाम अनेक ॥ 4 ॥
233. समर्थाई । रंग ताल
जीवत मारे मुये जिलाये, बोलत गूंगे गूंग बुलाये ॥ टेक ॥
जागत निशि भर सोई सुलाये, सोवत रैनि सोई जगाये ॥ 1 ॥
सूझत नैनहुँ लोइन लीये, अंध विचारे ता मुख दीये ॥ 2 ॥
चलते भारी ते बिठलाये, अपंग विचारे सोई चलाये ॥ 3 ॥
ऐसा अद्भुत हम कुछ पाया, दादू सतगुरु कहि समझाया ॥ 4 ॥
234. प्रश्न । रंग ताल
क्यों कर यह जग रच्यो, गुसांई ?
तेरे कौन विनोद बन्यो मन मांहीं ? टेक ॥
कै तुम आपा प्रकट करना, कै यहु रचले जीव उधरना ॥ 1 ॥
कै यहु तुम को सेवक जानैं, कै यहु रचले मन के मानैं ॥ 2 ॥
कै यहु तुम को सेवक भावै, कै यहु रचले खेल दिखावै ॥ 3 ॥
कै यहु तुम को खेल पियारा, कै यहु भावै कीन्ह पसारा ॥ 4 ॥
यहु सब दादू अकथ कहानी, कहि समझावो सारंग-पाणी ॥ 5 ॥
उत्तर की साखी
दादू परमारथ को सब किया, आप स्वारथ नांहिं । (15-50)
परमेश्वर परमारथी, कै साधू कलि मांहिं ॥ 1 ॥
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