सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
माया कारण मूल गँवावै, समझ देख मन मेरा।
अंत काल जब आइ पहूँता, कोई नहीं तब तेरा ॥ 1 ॥
मेरी मेरी कर नर जाणै, मन मेरी कर रहिया।
तब यहु मेरी काम न आवै, प्राण पुरुष जब गहिया ॥ 2 ॥
राव रंक सब राजा राणा, सबहिन को बोरावै।
छत्रपति भूपति तिन के संग, चलती बेर न आवै ॥ 3 ॥
चेत विचार जान जिय अपने, माया संग न जाई।
दादू हरि भज समझ सयाना, रहो राम ल्यौ लाई ॥ 4 ॥
224. काल चेतावनी । ललित ताल
रहसी एक उपावनहारा, और चलसी सब संसारा ॥ टेक ॥
चलसी गगन धरणि सब चलसी, चलसी पवन अरु पानी।
चलसी चंद सूर पुनि चलसी, चलसी सबै उपानी ॥ 1 ॥
चलसी दिवस रैण भी चलसी, चलसी जुग जम वारा।
चलसी काल व्याल पुनि चलसी, चलसी सबै पसारा ॥ 2 ॥
चलसी स्वर्ग नरक भी चलसी, चलसी भूचणहारा।
चलसी सुख दुःख भी चलसी, चलसी कर्म विचारा ॥ 3 ॥
चलसी चंचल निहचल रहसी, चलसी जे कुछ कीन्हा।
दादू देख रहै अविनाशी, और सबै घट खीना ॥ 4 ॥
225. त्रिताल
इहि कलि हम मरणे को आये, मरण मीत उन संग पठाये ॥ टेक ॥
जब तैं यहु हम मरण विचारा, तब तैं आगम पंथ सँवारा ॥ 1 ॥
मरण देख हम गर्व न कीन्हा, मरण पठाये सो हम लीन्हा ॥ 2 ॥
मरणा मीठा लागे मोहि, इहि मरणे मीठा सुख होहि ॥ 3 ॥
मरणे पहली मरे जो कोई, दादू सो अजरावर होई ॥ 4 ॥
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