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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 394, कुल 504 में से

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पृष्ठ 394

श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
जाग जतन कर राखो सोई, तब तन तत्त न जाई ।
चेतन पहरे चेतत नांहीं, कहि दादू समझाई ॥ ३ ॥
२२०. राज विद्याधर ताल
देखत ही दिन आइ गये, पलट केश सब श्वेत भये ॥ टेक ॥
आई जुरा मीच अरु मरणा, आया काल अबै क्या करणा ।
श्रवणों सुरति गई नैन न सूझै, सुधि बुधि नाठी कह्या न बूझै ॥ १ ॥
मुख तैं शब्द विकल भई वाणी, जन्म गया सब रैन बिहाणी ।
प्राण पुरुष पछतावण लागा, दादू अवसर काहे न जागा ॥ २ ॥
२२१. उपदेश । राज विद्याधर ताल
हरि बिन हां, हो कहूँ सचु नांहीं, देखत जाई विषय फल खाहीं ॥ टेक ॥
रस रसना के मीन मन भीरा, जल तैं जाइ यों दहै शरीरा ॥ १ ॥
गज के ज्ञान मगन मद माता, अंकुँए डोरि गहै फँद गाता ॥ २ ॥
मर्कट मूठी मांहिं मन लागा, दुख की राशि भ्रमै भ्रम भागा ॥ ३ ॥
दादू देखु हरि सुखदाता, ताको छाड़ि कहाँ मन राता ॥ ४ ॥
२२२. उदीक्षण ताल
सांई बिना संतोष न पावै, भावै घर तजि वन वन धावै ॥ टेक ॥
भावै पढ़ि गुनि वेद उचारै, आगम निगम सबै विचारै ॥ १ ॥
भावै नव खंड सब फिर आवै, अजहूँ आगै काहे न जावै ॥ २ ॥
भावै सब तजि रहै अकेला, भाई बन्धु न काहू मेला ॥ ३ ॥
दादू देखै सांई सोई, साच बिना संतोष न होई ॥ ४ ॥
२२३. मनोपदेश चेतावनी । उदीक्षण ताल
मन माया रातो भूले ।
मेरी मेरी कर कर बौरे, कहा मुग्ध नर फूले ॥ टेक ॥

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