सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग आसावरी 9
पीव घर आवनो ए, अहो ! मोहि भावनो ते ॥ टेक ॥
मोहन नीको री हरी, देखूंगी अँखियाँ भरी ।
राखूं हौं उर धरी प्रीति करी खरी, मोहन मेरो री माई ।
रहूँ हौं चरणौं धाई, आनन्द बधाई, हरि के गुण गाई ॥ 1 ॥
दादू रे चरण गहिये, जाइने तिहाँतो रहिये ।
तन मन सुख लहिये, विनती गहिये ॥ 2 ॥
217. त्रिताल
हाँ माई ! मेरो राम बैरागी, तजि जनि जाइ ॥ टेक ॥
राम विनोद करत उर अंतर, मिलिहौं बैरागिनि धाइ ॥ 1 ॥
जोगिन ह्रै कर फिरूँगी विदेसा, राम नाम ल्यौ लाइ ॥ 2 ॥
दादू को स्वामी है रे उदासी, रहिहौं नैन दोइ लाइ ॥ 3 ॥
218. उपदेश चेतावनी । राज मृगांक ताल
रे मन ! गोविन्द गाइ रे गाइ, जन्म अविरथा जाइ रे जाइ ॥ टेक ॥
ऐसा जनम न बारम्बारा, तातैं जप ले राम पियारा ॥ 1 ॥
यहु तन ऐसा बहुरि न पावै, तातैं गोविन्द काहे न गावै ॥ 2 ॥
बहुरि न पावै मानुष देही, तातैं कर ले राम सनेही ॥ 3 ॥
अब के दादू किया निहाला, गाइ निरंजन दीनदयाला ॥ 4 ॥
219. काल चेतावनी । राज मृगांक ताल
मन रे ! सोवत रैन बिहानी, तैं अजहूँ जात न जानी ॥ टेक ॥
बीती रैन बहुरि नहीं आवे, जीव जाग जनि सोवे ।
चारों दिशा चोर घर लागे, जाग देख क्या होवे ॥ 1 ॥
भोर भयो पछतावन लागे, मांहीं महल कुछ नांहीं ।
जब जाइ काल काया कर लागे,तब सोधे घर मांहीं ॥ 2 ॥
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