सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 392, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 392

श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9

तूँ ही मेरी जीवनि दादू मांही ॥ 4 ॥
214. अनन्य शरण । झूमरा
तुम्हारे नाम लाग हरि ! जीवन मेरा ।
मेरे साधन सकल नाम निज तेरा ॥ टेक ॥
दान पुन्य तप तीरथ मेरे, केवल नाम तुम्हारा ।
यह सब मेरे सेवा पूजा, ऐसा बरत हमारा ॥ 1 ॥
यह सब मेरे वेद पुराणा, सुचि संयम है सोई ।
ज्ञान ध्यान येही सब मेरे, और न दूजा कोई ॥ 2 ॥
काम क्रोध काया वश करना, ये सब मेरे नामा ।
मुक्ता गुप्ता परगट कहिये, मेरे केवल रामा ॥ 3 ॥
तारण तिरण नांव निज तेरा, तुमही एक आधारा ।
दादू अंग एक रस लागा, नांव गहै भव पारा ॥ 4 ॥
215. चतुस्ताल
हरि केवल एक अधारा, सोई तारण तिरण हमारा ॥ टेक ॥
ना मैं पंडित पढ़ि गुणि जानूं , ना कुछ ज्ञान विचारा ।
ना मैं अगमी ज्योतिग जानूं, ना मुझ रूप सिंगारा ॥ 1 ॥
ना तप मेरे इन्द्रिय निग्रह, ना कुछ तीरथ फिरणां ।
देवल पूजा मेरे नाहीं, ध्यान कछू नहिं धरणां ॥ 2 ॥
योग युक्ति कछु नाहीं मेरे, ना मैं साधन जानूं ।
औषधि मूली मेरे नाहीं, ना मैं देश बखानूं ॥ 3 ॥
मैं तो और कछू नाहिं जानूं, कहो और क्या कीजे ।
दादू एक गलित गोविन्द सौं, इहि विधि प्राण पतीजे ॥ 4 ॥
216. परिचय चतुस्ताल

  • 392 -