सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8
शीश हमारा जीव ले, नौछावर कीजे ॥ 2 ॥
भाव भक्ति कर प्रीति सौं, प्रेम रस पीजे ।
सेवा वंदन आरती, यहु लाहा लीजे ॥ 3 ॥
भाग हमारा हे सखी, सुख सागर पाया ।
दादू को दर्शन भया, मिले त्रिभुवन राया ॥ 4 ॥
199. संत समागम प्रार्थना । दादरा
निरंजन नाम के रस माते, कोई पूरे प्राणी राते ॥ टेक ॥
सदा सनेही राम के, सोई जन साचे ।
तुम बिन और न जानहीं, रंग तेरे ही राचे ॥ 1 ॥
आन न भावै एक तूं, सति साधु सोई ।
प्रेम पियासे पीव के, ऐसा जन कोई ॥ 2 ॥
तुम हीं जीवन उर रहे, आनन्द अनुरागी ।
प्रेम मगन पीव प्रितड़ी, लै तुम सौं लागी ॥ 3 ॥
जे जन तेरे रंग रंगे, दूजा रंग नांही ।
जन्म सुफल कर लीजिये, दादू उन मांहीं ॥ 4 ॥
200. अत्यन्त निर्मल उपदेश । दादरा
चलु रे मन ! जहाँ अमृत वना, निर्मल नीके संत जना ॥ टेक ॥
निर्गुण नांव फल अगम अपार, संतन जीवन प्राण अधार ॥ 1 ॥
सीतल छाया सुखी शरीर, चरण सरोवर निर्मल नीर ॥ 2 ॥
सुफल सदा फल बारह मास, नाना वाणी धुनि प्रकाश ॥ 3 ॥
तहाँ वास बसि अमर अनेक, तहँ चलि दादू इहै विवेक ॥ 4 ॥
201. चौताल
चलो मन माहरा, जहाँ मित्र अम्हारा ।
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