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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 504 में से

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पृष्ठ 384

श्री दादूवाणी-राग रामकली 8
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साचा राम न जाणै रे, सब झूठ बखाणै रे ॥ टेक ॥
झूठे देवा झूठी सेवा, झूठा करे पसारा।
झूठी पूजा झूठी पाती, झूठा पूजणहारा ॥ 1 ॥
झूठा पाक करै रे प्राणी, झूठा भोग लगावै।
झूठा आड़ा पड़दा देवै, झूठा थाल बजावै ॥ 2 ॥
झूठे वक्ता झूठे श्रोता, झूठी कथा सुणावै।
झूठा कलियुग सब को मानै, झूठा भ्रम दिढ़ावै ॥ 3 ॥
स्थावर जंगम जल थल महियल, घट घट तेज समाना।
दादू आतम राम हमारा, आदि पुरुष पहिचाना ॥ 4 ॥

  1. निज मार्ग निर्णय । चौताल
    मैं पंथी एक अपार का, मन और न भावै।
    सोई पंथ पावै पीव का, जिसे आप लखावै ॥ टेक ॥
    को पंथी हिंदू तुरक के, को काहू राता।
    को पंथी सोफी सेवड़े, को सन्यासी माता ॥ 1 ॥
    को पंथी जोगी जंगमा, को शक्ति पंथ ध्यावै।
    को पंथी कमड़े कापड़ी, को बहुत मनावै ॥ 2 ॥
    को पंथी काहू के चलै, मैं और न जानूं।
    दादू जिन जग सिरजिया, ताही को मानूं ॥ 3 ॥

  2. साधु मिलाप मंगल । चौताल
    आज हमारे रामजी साधु घर आये,
    मंगलाचार चहुँ दिशि भये, आनन्द बधाये ॥ टेक ॥
    चौक पुराऊँ मोतियां, घिस चंदन लाऊँ।
    पंच पदारथ पोइ के , यहु माल चढ़ाऊँ ॥ 1 ॥
    तन मन धन करूँ वारनैं, प्रदक्षिणा दीजे।

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