सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8
तहँ जामण मरण नहिं जाणिये, नहिं जाणिये ॥ टेक ॥
मोह न माया, मेरा न तेरा, आवागमन नहीं जम फेरा ॥ 1 ॥
पिंड पड़े नहीं प्राण न छूटै, काल न लागै आयु न खूटै ॥ 2 ॥
अमर लोक तहँ अखिल शरीरा, व्याधि विकार न व्यापै पीरा ॥ 3 ॥
राम राज कोई भिड़े न भाजै, सुस्थिर रहणा बैठा छाजै ॥ 4 ॥
अलख निरंजन और न कोई, मित्र अम्हारा दादू सोई ॥ 5 ॥
202. बेली । त्रिताल
बेली आनन्द प्रेम समाइ ।
सहजैं मगन राम रस सींचै, दिन दिन बधती जाइ ॥ टेक ॥
सतगुरु सहजैं बाही बेली, सहज गगन घर छाया ।
सहजैं सहजैं कोंपल मेल्है, जाणै अवधू राया ॥ 1 ॥
आतम बेली सहजैं फूलै, सदा फूल फल होई ।
काया बाड़ी सहजैं निपजै, जानैं विरला कोई ॥ 2 ॥
मन हठ बेली सूखण लागी, सहजैं जुग जुग जीवै ।
दादू बेली अमर फल लागै, सहज सदा रस पीवै ॥ 3 ॥
203. शब्द बाण । त्रिताल
संतों ! राम बाण मोहि लागे ।
मारत मृग मर्म तब पायो, सब संगी मिल जागे ॥ टेक ॥
चित चेतन चिंतामणि चीन्हा, उलट अपूठा आया ।
मंदिर पैसि बहुरि नहिं निकसै, परम तत्त घर पाया ॥ 1 ॥
आवै न जाइ, जाइ नहिं आवै, तिहिं रस मनवा माता ।
पान करत परमानन्द पायो, थकित भयो चलि जाता ॥ 2 ॥
भयो अपंग पंक नहि लागै, निर्मल संग सहाई ।
पूर्ण ब्रह्म अखिल अविनाशी, तिहिं तज अनत न जाई ॥ 3 ॥
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