सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8
झूठा कलियुग कह्या न जाइ, अमृत को विष कहै बनाइ ॥ टेक ॥
धन को निर्धन, निर्धन को धन, नीति अनीति पुकारै ।
निर्मल मैला, मैला निर्मल, साध चोर कर मारै ॥ 1 ॥
कंचन काच, काच को कंचन, हीरा कंकर भाखै ।
माणिक मणियाँ, मणियाँ माणिक, साँच झूठ कर नाखै ॥ 2 ॥
पारस पत्थर, पत्थर पारस, कामधेनु पशु गावै ।
चन्दन काठ, काठ को चन्दन, ऐसी बहुत बनावै ॥ 3 ॥
रस को अणरस, अणरस को रस, मीठा खारा होई ।
दादू कलिजुग ऐसा बरतै, साचा बिरला कोई ॥ 4 ॥
190. भगवंत भरोसा । ललित ताल
दादू मोहि भरोसा मोटा,
तारण तिरण सोई संग मेरे, कहा करै कलि खोटा ॥ टेक ॥
दौं लागी दरिया तै न्यारी, दरिया मंझ न जाई ।
मच्छ कच्छ रहैं जल जेते, तिन को काल न खाई ॥ 1 ॥
जब सूवै पिंजर घर पाया, बाज रह्या वन मांहीं ।
जिनका समर्थ राखणहारा, तिनको को डर नांहीं ॥ 2 ॥
साचे झूठ न पूजै कबहुँ, सत्य न लागै काई ।
दादू साचा सहज समाना, फिर वै झूठ विलाई ॥ 3 ॥
191. सांच झूठ निर्णय प्रतिपाल
सांई को साच पियारा ।
साचै साच सुहावै देखो, साचा सिरजनहारा ॥ टेक ॥
ज्यों घण घावां सार घड़ीजे, झूठ सबै झड़ जाई ।
घण के घाऊँ सार रहेगा, झूठ न मांहि समाई ॥ 1 ॥
कनक कसौटी अग्नि-मुख दीजे, पंक सबै जल जाई ।
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