सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8
यों तो कसणी सांच सहेगा, झूठ सहै नहिं भाई ॥ 2 ॥
ज्यों घृत को ले ताता कीजे, ताइ ताइ तत्त कीन्हा।
तत्तैं तत्त रहेगा भाई, झूठ सबै जल खीना ॥ 3 ॥
यों तो कसणी साच सहेगा, साचा कस कस लेवै ।
दादू दर्शन सांचा पावै, झूठे दरस न देवै ॥ 4 ॥
192. करणी बिना कथनी । प्रतिपाल
बातैं बाद जाहिंगी भइये, तुम जनि जानों बातनि पइये ॥ टेक ॥
जब लग अपना आप न जानै, तब लग कथनी काची ।
आपा जान सांई को जानै, तब कथनी सब साची ॥ 1 ॥
करनी बिना कंत नहीं पावै, कहे सुने का होई ।
जैसी कहै करै जे तैसी, पावैगा जन सोई ॥ 2 ॥
बातनि हीं जे निर्मल होवे, तो काहे को कस लीजे ।
सोना अग्नि दहै दस बारा, तब यहु प्रान पतीजे ॥ 3 ॥
यौं हम जाना मन पतियाना, करनी कठिन अपारा।
दादू तन का आपा जारे, तो तिरत न लागे बारा ॥ 4 ॥
193. उपदेश । पंजाबी-त्रिताल
पंडित, राम मिलै सो कीजे ।
पढ़ पढ़ वेद पुराण बखानैं, सोई तत्त्व कह दीजे ॥ टेक॥
आतम रोगी विषम बियाधी, सोई कर औषधि सारा।
परसत प्राणी होइ परम सुख, छूटै सब संसारा ॥ 1 ॥
ए गुण इन्द्री अग्नि अपारा, ता सन जलै शरीरा।
तन मन शीतल होइ सदा सुख, सो जल नहाओ नीरा ॥ 2 ॥
सोई मार्ग हमहिं बताओ, जेहि पंथ पहुँचे पारा।
भूलि न परै उलट नहीं आवै, सो कुछ करहु विचारा ॥ 3 ॥
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