सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग रामकली 8
तुम्ह बिन अवर कोई कलि मां नहीं, सुमरतां संत नें साद आपे ।
कर्म कीधा कोटि छोड़वे बाँधो, नाम लेतां ख्रिणत ही ये कापे ॥ 1 ॥
संत नें सांकड़ो दुष्ट पीड़ा करे, वाहरे वाहलो वेगि आवे ।
पापनां पुंज पह्वां करी लीधो, भाजिया भै भर्म जोनि न आवे ॥ 2 ॥
साधनें दुहेलो तहाँ तूँ आकुलो, माहरो माहरो करीनें धाए ।
दुष्ट नें मारिबा संत नें तारिबा, प्रकट थावा तहाँ आप जाए ॥ 3 ॥
नाम लेतां ख्रिण नाथ तें एकले, कोटिनां कर्मनां छेद कीधा ।
कहै दादू हिवें तुम्ह बिना को नहीं, साखी बोलें जे शरण लीधा ॥ 4 ॥
180. परिचय विनती राज । विद्याधर ताल
हरि नाम देहु निरंजन तेरा, हरि हर्ष जपै जिय मेरा ॥ टेक ॥
भाव भक्ति हेत हरि दीजे, प्रेम उमंग मन आवे ।
कोमल वचन दीनता दीजे, राम रसायन भावे ॥ 1 ॥
विरह बैराग्य प्रीति मोहि दीजे, हृदय सांच सत भाखूं ।
चित चरणों चिंतामणि दीजे, अंतर दिढ़ कर राखूं ॥ 2 ॥
सहज संतोष सील सब दीजे, मन निश्चल तुम्ह लागे ।
चेतन चिंतन सदा निवासी, संग तुम्हारे जागे ॥ 3 ॥
ज्ञान ध्यान मोहन मोहि दीजे, सुरति सदा सँग तेरे ।
दीन दयाल दादू को दीजे, परम ज्योति घट मेरे ॥ 4 ॥
181. आशीर्वाद मंगल । झपताल
जय जय जय जगदीश तूँ, तूँ समर्थ सांई ।
सकल भुवन भानैं घड़ै, दूजा को नांहीं ॥ टेक ॥
काल मीच करुणा करै, जम किंकर माया ।
महा जोध बलवंत बली, भय कंपै राया ॥ 1 ॥
जरा मरण तुम तैं डरै, मन को भय भारी ।
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