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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 504 में से

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पृष्ठ 376

श्री दादूवाणी-राग रामकली 8
काल अहेडी बधिक है लागे, ज्यूं जीव बाज गहे ॥ 1 ॥
ग्यान ध्यान हिरदै हरि लीना, संग ही घेर रहे।
समझि न परई बाप रमैया, तुम्ह बिन शूल सहे ॥ 2 ॥
शरण तुम्हारी राखो गोविन्द, इन सौं संग न दीजे।
इनके संग बहुत दुख पाया, दादू को गहि लीजे ॥ 3 ॥
177. भयमान विनती । रंगताल
राम कृपा कर होहु दयाला, दर्शन देहु करहु प्रतिपाला ॥ टेक ॥
बालक दूध न देइ माता, तो वह क्यों कर जीवै विधाता ॥ 1 ॥
गुण औगुण हरि कुछ न विचारै, अंतर हेत प्रीति कर पालै ॥ 2 ॥
अपणो जान करै प्रतिपाला, नैन निकट उर धरै गोपाला ॥ 3 ॥
दादू कहै नहीं वश मेरा, तूं माता मैं बालक तेरा ॥ 4 ॥
178 (गुजराती) विनती । त्रिताल
भक्ति मांगूं बाप भक्ति मांगूं, मूने ताहरा नांऊं नों प्रेम लाग्यो।
शिवपुर ब्रह्मपुर सर्व सौं कीजिये, अमर थावा नहींलोक मांगूं ॥ टेक ॥
आप अवलंबन ताहरा अंगनों, भक्ति संजीवनी रंग राचूं।
देहनें गेहनौं बास बैकुंठ तणौं, इन्द्र आसण नहीं मुक्ति जाचूं ॥ 1 ॥
भक्ति वाहली खरी आप अविचल हरि, निर्मलो नाउं रस पान भावे।
सिद्धि नें रिद्धि नें राज रूड़ो नहीं, देव पद माहरे काज न आवे ॥ 2 ॥
आत्मा अंतर सदा निरंतर, ताहरी बापजी भक्ति दीजे।
कहै दादू हिवे कौड़ी दत आपे, तुम्ह बिना ते म्हें नहीं लीजे ॥ 3 ॥
179. (गुजराती) राज विद्याधर ताल
एह्वो एक तूँ राम जी नाम रूड़ो।
ताहरा नाम बिना बीजो सबै ही कूड़ो ॥ टेक ॥

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