सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 374, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 374

सुहारी सुरति केला, लगे डीहु घणां ॥ टेक॥
पीरीयां संदी गाल्हड़ीला, पांधीड़ा पूछं ।
कड़ी ईंदो मूं गरेला, डीडों बांह असां ॥ 1 ॥
आहे सिक दीदार जीला, पिरी पूर पसां ।
इयें दादू जे ज्यंद येला, सजण सांण रहां ॥ 2 ॥
172. विनती पंजाबी । त्रिताल
हरि हाँ दिखाओ नैना,
सुन्दर मूरति मोहना, बोलि सुनाओ बैना ॥ टेक॥
प्रकट पुरातन खंडना, महीमान सुख मंडना ॥ 1 ॥
अविनाशी अपरम्परा, दीनदयाल गगन धरा ॥ 2 ॥
पारब्रह्म परिपूरणां, दर्श देहु दुख दूरणां ॥ 3 ॥
कर कृपा करुणामई, तब दादू देखे तुम दई ॥ 4 ॥
173. निस्पृहता पंजाबी । त्रिताल
राम सुख सेवक जानै रे, दूजा दुख कर माने रे ॥ टेक॥
और अग्नि की झाला, फंद रोपे हैं जम जाला ।
सम काल कठिन शर पेखें, यह सिंह रूप सब देखें ॥ 1 ॥
विष सागर लहर तरंगा, यहु ऐसा कूप भुवंगा ।
भयभीत भयानक भारी, रिपु करवत मीच विचारी ॥ 2 ॥
यहु ऐसा रूप छलावा, ठग पासीहारा आवा ।
सब ऐसा देख विचारे, ये प्राण घात बटपारे ॥ 3 ॥
ऐसा जन सेवक सोई, मन और न भावै कोई ।
हरि प्रेम मगन रंग राता, दादू राम रमै रस माता ॥ 4 ॥
174. साधु महिमा । जय मंगल ताल
आप निरंजन यों कहै, कीरति करतार ।