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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 373, कुल 504 में से

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पृष्ठ 373

श्री दादूवाणी-राग रामकली 8
168. नाम महिमा । त्रिताल
अहो नर नीका है हरि नाम ।
दूजा नहीं राम बिन नीका, कहले केवल राम ॥ टेक ॥
निर्मल सदा एक अविनाशी, अजर अकल रस ऐसा ।
दिढ़ गहि राख मूल मन मांहीं, निरख देख निज कैसा ॥ 1 ॥
यहु रस मीठा महा अमीरस, अमर अनूपम पीवे ।
राता रहै प्रेम सौं माता, ऐसे जुग-जुग जीवे ॥ 2 ॥
दूजा नहीं और को ऐसा, गुरु अंजन कर सूझे ।
दादू मोटे भाग हमारे, दास विवेकी बूझे ॥ 3 ॥
169. अत्यन्त विरह । त्रिताल
कब आवेगा कब आवेगा ?
पीव प्रकट आप दिखावेगा, मिठड़ा मुझको भावेगा ॥ टेक ॥
कंठड़े लाग रहूँ रे, नैनों में बाहि धरूं रे, पीव तुझ बिन झूर मरूं रे ॥ 1 ॥
पावों मस्तक मेरा रे, तन मन पीवजी तेरा रे, हौं राखूं नैनहुं नेरा रे ॥ 2 ॥
हियड़े हेत लगाऊँ रे, अब कै जे पीव पाऊँ रे, तो बेर बेर बलि जाऊँ रे ॥ 3 ॥
सेजड़िये पीव आवे रे, तब आनन्द अंग न मावे रे, दादू दरस दिखावे रे ॥ 4 ॥
170. (सिन्धी भाषा) । मल्लिका मोद ताल
पिरी तूं पाण पसाइड़े, मूं तनि लागी भाहिड़े ॥ टेक ॥
पांधी वींदो निकरीला, असां साण गल्हाइड़े ।
सांई सिकां सड़केला, गुझी गालि सुनाइड़े ॥ 1 ॥
पसां पाक दीदार केला, सिक असां जी लाहिड़े ।
दादू मंझि कलूब मेला, तोड़े बीयां न काइड़े ॥ 2 ॥
171. (सिन्धी भाषा) । मल्लिका मोद ताल
को मेड़ीदो सज्जणा,

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