सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
दादू कहै, सो गुरु किस काम का, गहि भ्रमावै आन।
तत्त बतावै निर्मला, सो गुरु साध सुजान ॥ 121 ॥
तूं मेरा, हूं तेरा, गुरु सिष किया मंत।
दोनों भूले जात हैं, दादू बिसऱ्या कंत ॥ 122 ॥
दुहि दुहि पीवै ग्वाल गुरु, सिष है छेली गाइ।
यह औसर योंही गया, दादू कहि समझाइ ॥ 123 ॥
शिष गोरु, गुरु ग्वाल है, रक्षा कर कर लेइ ।
दादू राखै जतन कर, आनि धणी को देय ॥ 124 ॥
झूठे अंधे गुरु घणे, भरम दिढ़ावैं आइ।
दादू साचा गुरु मिलै, जीव ब्रह्म है जाइ ॥ 125 ॥
झूठे अंधे गुरु घणे, बँधे विषय विकार ।
दादू साचा गुरु मिल्या, सन्मुख सिरजनहार ॥ 126 ॥
झूठे अंधे गुरु घणे, भरम दिढ़ावैं काम।
बँधे माया मोह सौं, दादू मुख सौं राम ॥ 127 ॥
झूठे अँधे गुरु घणे, भटकैं घर घर बार।
कारज को सीझै नहीं, दादू माथै मार ॥ 128 ॥
बेखर्च व्यवसनी
दादू भक्त कहावैं आपको, भक्ति न जानैं भेव।
सुपनै ही समझैं नहीं, कहाँ बसै गुरुदेव ॥ 129 ॥
भ्रम विध्वंस
भ्रम कर्म जग बंधिया, पंडित दिया भुलाइ।
दादू सतगुरु ना मिले, मारग देइ दिखाइ ॥ 130 ॥
दादू पंथ बतावैं पाप का, भ्रम कर्म विश्वास।
निकट निरंजन जे रहै, क्यों न बतावैं तास ॥ 131 ॥
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