सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
विचार
दादू आपा उरझे उरझिया, दीसे सब संसार।
आपा सुरझे सुरझिया, यह गुरु ज्ञान विचार ॥ 132 ॥
गुरुमुख कसौटी
साधु अंग का निर्मला, तामें मल न समाइ।
परम गुरु प्रकट कहै, ताथैं दादू ताइ ॥ 133 ॥
सुमिरण नाम चितावणी
राम नाम गुरु सबद सौं, रे मन पेलि भरम।
निहकर्मी सौं मन मिल्या, दादू काटि करम ॥ 134 ॥
सूक्ष्म मार्ग
दादू बिन पाइन का पंथ, क्यों करि पहुँचे प्राण।
विकट घाट औघट खरे, मांहि शिखर असमान ॥ 135 ॥
मन ताजी चेतन चढै, ल्यौ की करै लगाम।
शब्द गुरु का ताजणां, कोइ पहुंचे साधु सुजाण ॥ 136 ॥
पारख लक्षण
साधौं सुमिरण सो कह्या, जिहि सुमिरण आपा भूल।
दादू गहि गंभीर गुरु, चेतन आनन्द मूल ॥ 137 ॥
स्वार्थी परमार्थी
दादू आप स्वारथ सब सगे, प्राण सनेही नांहि।
प्राण सनेही राम है, कै साधु कलि मांहि ॥ 138 ॥
सुख का साथी जगत सब, दुख का नाहीं कोइ।
दुख का साथी सांइयाँ, दादू सतगुरु होइ ॥ 139 ॥
सगे हमारे साध हैं, सिर पर सिरजनहार।
दादू सतगुरु सो सगा, दूजा धंध विकार ॥ 140 ॥
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