सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग केदार 6
कंथा पहरूँ, भस्म लगाऊँ, वैरागिनि ह्वै ढूँढूँ, रे राम ॥ 1 ॥
गिरिवर वासा, रहूँ, उदासा, चढ़ि सिर मेरु पुकारूँ, रे राम ॥ 2 ॥
यहु तन जालूूँ, यहु मन गालूँ, करवत शीश चढ़ाऊँ, रे राम ॥ 3 ॥
शीश उतारूँ, तुम्ह पर वारूँ, दादू बलि बलि जाऊँ, रे राम ॥ 4 ॥
119. विनती । गजताल
अरे मेरा अमर उपावणहार रे खालिक! आशिक तेरा ॥ टेक ॥
तुम सौं राता, तुम सौं माता, तुम सौं लागा रंग, रे खालिक ॥ 1 ॥
तुम सौं खेला, तुम सौं मेला, तुम सौं प्रेम स्नेह, रे खालिक ॥ 2 ॥
तुम सौं लेना, तुम सौं देणा, तुम्हीं सौं रत होइ, रे खालिक ॥ 3 ॥
खालिक मेरा, आशिक तेरा, दादू अनत न जाइ, रे खालिक ॥ 4 ॥
120. स्तुति । गजताल
अरे मेरे समर्थ साहिब रे अल्लह! नूर तुम्हारा ॥ टेक ॥
सब दिशि देवै, सब दिश लेवै, सब दिशि वार न पार, रे अल्लह ॥ 1 ॥
सब दिशि कर्त्ता, सब दिशि हर्त्ता, सब दिशि तारणहार, रे अल्लह ॥ 2 ॥
सब दिशि वक्ता, सब दिशि श्रोता, सब दिशि देखणहार, रे अल्लह ॥ 3 ॥
तूँ है तैसा, कहिये ऐसा, दादू आनन्द होइ, रे अल्लह ॥ 4 ॥
121. (सिंधी) विरह विलाप । मल्लिका मोद ताल
हाल असां जो लालड़े, तो के सब मालूमड़े ॥ टेक ॥
मंझे खामा मंझि बराला, मंझे लागी भाहिड़े ।
मंझे मेड़ी मुच थईला, कै दरि करियां धाहड़े ॥ 1 ॥
विरह कसाई मुं गरेला, मंझे बढ़े माइहड़े ।
सीखों करे कवाब जीला, इयें दादू जो ह्याहड़े ॥ 2 ॥
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