सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग केदार 6
122. विनती । मल्लिका मोद ताल
पीवजी सेती नेह नवेला, अति मीठा मोहि भावे रे ।
निशदिन देखौं बाट तुम्हारी, कब मेरे घर आवे रे ॥ टेक ॥
आइ बनी है साहिब सेती, तिस बिन तिल क्यों जावे रे ।
दासी कों दर्शन हरि दीजे, अब क्यों आप छिपावे रे ॥ 1 ॥
तिल तिल देखूं साहिब मेरा, त्यों त्यों आनन्द अंग न मावे रे ।
दादू ऊपर दया मया करि, कब नैनहुँ नैन मिलावे रे ॥ 2 ॥
123. (गुजराती भाषा) । राज मृगांक ताल
पीव घर आवे रे, वेदन मारी जाणी रे ।
विरह संताप कौण पर कीजे, कहूँ छूं दुख नी कहाणी रे ॥ टेक ॥
अंतरजामी नाथ मारा, तुज बिण हूँ सीदाणी रे ।
मंदिर मारे केम न आवे, रजनी जाइ बिहाणी रे ॥ 1 ॥
तारी बाट हूँ जोइ थाकी, नैण निखूट्या पाणी रे ।
दादू तुज बिण दीन दुखी रे, तूं साथी रह्यो छे ताणी रे ॥ 2 ॥
124. (गुजराती) विरह विनती । राज मृगांक ताल
कब मिलसी पीव गृह छाती, हौं औराँ संग मिलाती ॥ टेक ॥
तिसज लागी तिसही केरी, जन्म जन्म नो साथी ।
मीत हमारा आव पियारा, ताहरा रंग नी राती ॥ 1 ॥
पीव बिना मने नींद न आवे, गुण ताहरा ले गाती ।
दादू ऊपर दया मया करि, ताहरे वारणे जाती ॥ 2 ॥
125. विरह (गुजराती) । राज विद्याधर ताल
म्हारा रे वाहला ने काजे, हृदये जोवा ने हौं ध्यान धरूं।
आकुल थाये प्राण मारा, कोने कही पर करूं ॥ टेक ॥
संभार्यो आवे रे वाहला, वेहला एहों जोई ठरूं।
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