सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
पृष्ठ 352, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 352
राग केदार
www.dadooram.org
अथ राग केदार 6
(गायन समय संध्या 6 से 9 बजे )
117. विनती (गुजराती भाषा) । दीप चन्दी ताल
मारा नाथ जी, तारो नाम लेवाड़ रे । राम रतन हृदया मा राखे,
मारा वाहला जी, विषया थी वारे ॥ टेक ॥
वाहला वाणी ने मन मांहे मारे, चितवन तारो चित राखे ।
श्रवण नेत्र आ इन्द्री ना गुण, मारा मांहेला मल ते नाखे ॥ 1 ॥
वाहला जीवाड़े तो राम रमाड़े, मनें जीव्यानो फल ये आपे ।
तारा नाम बिना हौं ज्यां ज्यां बंध्यो, जन दादू ना बंधन कापे ॥ 2 ॥
118. विरह विनती । उत्सव ताल
अरे मेरे सदा के संगाती रे राम! कारण तेरे ॥ टेक ॥
- 352 -