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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 351, कुल 504 में से

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पृष्ठ 351
  1. ज्ञान । रूपक ताल
    भाई रे, तब क्या कथसि गियाना,
    जब दूसर नाहीं आना ॥ टेक ॥
    जब तत्त्वहिं तत्त्व समाना, जहाँ का तहँ ले साना ॥ 1 ॥
    जहाँ का तहाँ मिलावा, ज्यों था त्यों होइ आवा ॥ 2 ॥
    संधे संधि मिलाई, जहाँ तहाँ थिति पाई ॥ 3 ॥
    सब अंग सबही ठांहीं, दादू दूसर नांहीं ॥ 4 ॥
    इति राग अडाणा सम्पूर्ण ॥ 5 ॥ पद 6 ॥