सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग अडाणा 5
मुख दर्पण मांहि दिखावै, पीव प्रकट आन मिलावै ॥ 2 ॥
सतगुरु साचा धोवै, तो बहुरि न मैला होवै ॥ 3 ॥
तन मन फेरि सँवारै, दादू कर गहि तारै ॥ 4 ॥
113. गुरुमुख उपदेश (गुजराती) । ललित ताल
भाई रे, तेन्हों रूड़ो थाये, जे गुरुमुख मार्ग जाये ॥ टेक॥
कुसंगति परिहरिये, सत्संगति अणसरिये ॥ 1 ॥
काम क्रोध नहिं आणें, वाणी ब्रह्म बखाणें ॥ 2 ॥
बिषिया तैं मन वारै, ते आपणपो तारै ॥ 3 ॥
विष मूकी अमृत लीधो, दादू रूड़ो कीधो ॥ 4 ॥
114. विनती । पंचम ताल
बाबा मन अपराधी मेरा, कह्या न मानै तेरा ॥ टेक ॥
माया मोह मद माता, कनक कामिनी राता ॥ 1 ॥
काम क्रोध अहंकारा, भावै विषय विकारा ॥ 2 ॥
काल मीच नहिं सूझै, आतमराम न बूझै ॥ 3 ॥
समर्थ सिरजनहारा, दादू करै पुकारा ॥ 4 ॥
115. चेतावनी । पंचम ताल
भाई रे यूं विनशै संसारा, काम क्रोध अहंकारा ॥ टेक॥
लोभ मोह मैं मेरा, मद मत्सर बहुतेरा ॥ 1 ॥
आपा पर अभिमाना, केता गर्व गुमाना ॥ 2 ॥
तीन तिमिर नहिं जाहीं, पंचों के गुण माहीं ॥ 3 ॥
आतमराम न जाना, दादू जगत दीवाना ॥ 4 ॥
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