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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 340, कुल 504 में से

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पृष्ठ 340

श्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2
अगम अगोचर अपार अपरम्परा, को यहु तेरे चरित न जानैं ।
ये शोभा तुमको सोहे सुन्दर, बलि बलि जाऊँ दादू न जानैं ॥ ३ ॥
९३. गुरु ज्ञान। त्रिताल
ऐसा रे गुरु ज्ञान लखाया, आवै जाइ सो दृष्टि न आया ॥ टेक॥
मन थिर करूँगा, नाद भरूँगा, राम रमूँगा, रस माता ॥ १ ॥
अधर रहूँगा, करम दहूँगा, एक भजूंगा, भगवंता ॥ २ ॥
अलख लखूँगा, अकथ कथूँगा, एक मथूँगा, गोविन्दा ॥ ३ ॥
अगह गहूँगा, अकह कहूँगा, अलह लहूँगा, खोजन्ता ॥ ४ ॥
अचर चरूंगा, अजर जरूंगा, अतिर तिरूंगा, आनन्दा ॥ ५ ॥
यहु तन तारूं, विषय निवारूं, आप उबारूं, साधन्ता ॥ ६ ॥
आऊँ न जाऊँ, उनमनि लाऊँ, सहज समाऊँ, गुणवंता ॥ ७ ॥
नूर पिछाणूं, तेजहि जाणूं, दादू ज्योतिहि देखन्ता ॥ ८ ॥
९४. तत्व उपदेश। पंचम ताल
बंदे हाजिरां हजूर वे, अल्लह आली नूर वे ।
आशिकां रा सिदक साबित, तालिबां भरपूर वे ॥ टेक॥
वजूद में मौजूद है, पाक परवरदिगार वे ।
देख ले दीदार को, गैब गोता मार वे ॥ १ ॥
मौजूद मालिक तख्त खालिक, आशिकां रा ऐन वे ।
गुदर कर दिल मग्ज भीतर, अजब है यहु सैन वे ॥ २ ॥
अर्श ऊपर आप बैठा, दोस्त दाना यार वे ।
खोज कर दिल कब्ज कर ले, दरूने दीदार वे ॥ ३ ॥
हुशियार हाजिर चुस्त करदा, मीरां मेहरवान वे ।
देख ले दर हाल दादू, आप है दीवान वे ॥ ४ ॥

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