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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 339, कुल 504 में से

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पृष्ठ 339

श्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2
९०. परिचय । पंचम ताल
नीको धन हरि कर मैं जान्यौं, मेरे अखई वोही।
आगे पीछे सोई है रे, और न दूजा कोई ॥ टेक॥
कबहूँ न छाडूँ संग पिया को, हरि के दर्शन मोही।
भाग हमारे जो हौं पाऊँ, शरणै आयो तोही ॥ 1 ॥
आनन्द भयो सखी जिय मेरे, चरण कमल को जोई।
दादू हरि को बावरो, बहुरि वियोग न होई ॥ 2 ॥
९१. (फारसी) हित उपदेश । पंचम ताल
बाबा मर्दे मर्दां गोइ, ये दिल पाक कर्दम धोइ ॥ टेक॥
तर्क दुनियाँ दूर कर दिल, फर्ज फारिग होइ।
पैवस्त परवरदिगार सौं, आकिलां सिर सोइ ॥ 1 ॥
मनी मुरदः हिर्स फानी, नफ्स रा पामाल।
बदी रा बरतरफ करदः, नाम नेकी ख्याल ॥ 2 ॥
जिंदगानी मुरदः बाशद, कुंजे कादिर कार।
तालिबां रा हक, हासिल, पासबाने यार ॥ 3 ॥
मर्दे मर्दां सालिकां सर, आशिकां सुलतान।
हजूरी होशियार दादू, इहै गो मैदान ॥ 4 ॥
९२. ईश्वर चरित । त्रिताल
ये सब चरित तुम्हारे मोहना, मोहे सब ब्रह्माण्ड खंडा।
मोहे पवन पानी परमेश्वर, सब मुनि मोहे रवि चंदा ॥ टेक॥
साइर सप्त मोहे धरणी धरा, अष्ट कुली पर्वत मेरु मोहे।
तीन लोक मोहे जगजीवन, सकल भुवन तेरी सेव सोहे ॥ 1 ॥
शिव बिरंचि नारद मुनि मोहे, मोहे सुर सब सकल देवा।
मोहे इन्द्र फणीन्द्र पुनि मोहे, मुनि मोहे तेरी करत सेवा ॥ 2 ॥

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