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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2
95. वस्तु निर्देश। चौताल
निर्मल तत्त निर्मल तत्त निर्मल तत्त ऐसा।
निर्गुण निज निधि निरंजन, जैसा है तैसा ॥ टेक॥
उतपत्ति आकार नांही, जीव नांही काया।
काल नांही कर्म नांही, रहिता राम राया ॥ 1 ॥
शीत नांही घाम नांही, धूप नांही छाया।
बाव नांही वर्ण नांही, मोह नांही माया ॥ 2 ॥
धरणी आकाश अगम, चंद सूर नांही।
रजनी निशि दिवस नांही, पवना नहीं जांही ॥ 3 ॥
कृत्रिम घट कला नांही, सकल रहित सोई।
दादू निज अगम निगम, दूजा नहीं कोई ॥ 4 ॥
इति राग माली गौड़ सम्पूर्ण ॥ 2 ॥ पद 26 ॥

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