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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 333, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
मगन गलित महारस माता, तूँ है तब लग पीजै ।
दादू जब लग अंत न आवै, तब लग देखन दीजै ॥ ३ ॥
76. लांबी (अधीरता अस्थिरता) । दादरा
गुरुमुख पाइये रे, ऐसा ज्ञान विचार ।
समझ समझ समझ्या नहीं, लागा रंग अपार ॥ टेक ॥
जांण जांण जांण्यां नहीं, ऐसी उपजै आइ ।
बूझ बूझ बूझया नहीं, ढोरी लागा जाइ ॥ 1 ॥
ले ले ले लीया नहीं, हौंस रही मन मांहि ।
राख राख राख्या नहीं, मैं रस पीया नांहि ॥ 2 ॥
पाय पाय पाया नहीं, तेजैं तेज समाइ ।
कर कर कछु किया नहीं, आतम अंग लगाइ ॥ 3 ॥
खेल खेल खेल्या नहीं, सन्मुख सिरजनहार ।
देख देख देख्या नहीं, दादू सेवक सार ॥ 4 ॥
77. गुरु अधीन ज्ञान । दादरा
बाबा ! गुरुमुख ज्ञाना रे, गुरुमुख ध्याना रे ॥ टेक ॥
गुरुमुख दाता गुरुमुख राता, गुरुमुख गवना रे ।
गुरुमुख भवना, गुरुमुख छवना, गुरुमुख रवना रे ॥ 1 ॥
गुरुमुख पूरा, गुरुमुख शूरा, गुरुमुख वाणी रे ।
गुरुमुख देणा, गुरुमुख लेणा, गुरुमुख जाणी रे ॥ 2 ॥
गुरुमुख गहबा, गुरुमुख रहबा, गुरुमुख न्यारा रे ।
गुरुमुख सारा, गुरुमुख तारा, गुरुमुख पारा रे ॥ 3 ॥
गुरुमुख राया, गुरुमुख पाया, गुरुमुख मेला रे ।
गुरुमुख तेजं, गुरुमुख सेजं, दादू खेला रे ॥ 4 ॥

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