सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
पोषंतां पहली उठ गरजै, पीछें हाथ न आवै ।
भूखी भलै दूध नित दूणा, यों या धेनु दुहावै ॥ 1 ॥
ज्यों ज्यों खीण पड़े त्यों दूझै, मुक्ता मेल्यां मारै ।
घाटा रोक घेर घर आणैं, बांधी कारज सारै ॥ 2 ॥
सहजैं बांधी कदे न छूटै, कर्म बंधन छुट जाई ।
काटै कर्म सहज सौं बांधै, सहजैं रहै समाई ॥ 3 ॥
छिन छिन मांहि मनोरथ पूरै, दिन दिन होइ अनन्दा ।
दादू सोई देखतां पावै, कलि अजरावर कंदा ॥ 4 ॥
74. परिचय । कहरवा
जब घट परगट राम मिले ।
आत्म मंगलाचार चहुँ दिशि, जन्म सुफल कर जीत चले ॥ टेक ॥
भक्ति मुक्ति अभय कर राखे, सकल शिरोमणि आप किये ।
निर्गुण राम निरंजन आपै, अजरावर उर लाइ लिये ॥ 1 ॥
अपने अंग संग कर राखे, निर्भय नाम निशान बजावा ।
अविगत नाथ अमर अविनाशी, परम पुरुष निज सो पावा ॥ 2 ॥
सोई बड़भागी सदा सुहागी, परगट प्रीतम संग भये ।
दादू भाग बड़े वर वर कर, सो अजरावर जीत गये ॥ 3 ॥
75.पराभक्ति प्रार्थना । कहरवा
रमैया ! यहु दुख सालै मोहि ।
सेज सुहाग न प्रीति प्रेम रस, दर्शन नांहीं तोहि ॥ टेक ॥
अंग प्रसंग एक रस नांही, सदा समीप न पावै ।
ज्यों रस में रस बहुरि न निकसै, ऐसैं होइ न आवै ॥ 1 ॥
आत्मलीन नहीं निशिवासर, भक्ति अखंडित सेवा ।
सन्मुख सदा परस्पर नाहीं, तातें दुख मोहि देवा ॥ 2 ॥
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