सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-पारिख का अंग 27
साचे को साचा कहै, झूठे को झूठा।
दादू दुविधा को नहीं, ज्यों था त्यों दीठा ॥ 27 ॥
पारिख अपारिख
दादू हीरे को कंकर कहैं, मूरख लोग अजान।
दादू हीरा हाथ ले, परखैं साधु सुजान ॥ 28 ॥
हीरा कौड़ी ना लहै, मूरख हाथ गँवार।
पाया पारख जौहरी, दादू मोल अपार ॥ 29 ॥
अंधे हीरा परखिया, किया कौडी मोल।
दादू साधू जौहरी, हीरे मोल न तोल ॥ 30 ॥
सगुरा निगुरा
सगुरा निगुरा परखिये, साध कहैं सब कोइ।
सगुरा साचा, निगुरा झूठा, साहिब के दर होइ ॥ 31 ॥
सगुरा सत संयम रहै, सन्मुख सिरजनहार।
निगुरा लोभी लालची, भूंचै विषय विकार ॥ 32 ॥
कर्त्ता कसौटी
खोटा खरा परखिये, दादू कस-कस लेइ।
साचा है सो राखिये, झूठा रहण न देइ ॥ 33 ॥
पारिख अपारिख
खोटा खरा कर देवै पारिख, तो कैसे बन आवै।
खरे खोटा का न्याय नबेरे, साहिब के मन भावै ॥ 34 ॥
दादू जिन्हें ज्यों कही, तिन्हें त्यों मानी, ज्ञान विचार न कीन्हा।
खोटा खरा जीव परख न जानै, झूठ सच करि लीन्हा ॥ 35 ॥
कर्त्ता कसौटी
जे निधि कहीं न पाइये, सो निधि घर-घर आहि।
दादू महँगे मोल बिन, कोई न लेवे ताहि ॥ 36 ॥
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