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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 267

श्री दादूवाणी-पारिख का अंग 27
खरी कसौटी कीजिये, वाणी बधती जाइ।
दादू साचा परखिये, महँगे मोल बिकाइ ॥ 37 ॥
दादू राम कसै सेवक खरा, कदे न मोड़ै अंग।
दादू जब लग राम है, तब लग सेवक संग ॥ 38 ॥
दादू कस कस लीजिये, यहु ताते परिमान।
खोटा गाँठ न बाँधिये, साहिब के दीवान ॥ 39 ॥
खरी कसौटी पीव की, कोई बिरला पहुँचनहार।
जे पहुँचे ते ऊबरे, ताइ किये तत सार ॥ 40 ॥
दुर्बल देही निर्मल वाणी, दादू पंथी ऐसा जाणी।
काहू जीव विरोधे नांही, परमेश्वर देखे सब माँही ॥ 41 ॥
दादू साहिब कसै सेवक खरा, सेवक को सुख होइ।
साहिब करै सो सब भला, बुरा न कहिये कोइ ॥ 42 ॥
दादू ठग आमेर में, साधौं सौं कहियो।
हम शरणाई राम की, तुम नीके रहियो ॥ 43 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
सत्ताईसवां पारिख कअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 27 ॥ साखी 43 ॥

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