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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 260, कुल 504 में से

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पृष्ठ 260

श्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26
दादू मरणे को चला, सजीवन के साथ ।
दादू लाहा मूल सौं, दोनों आये हाथ ॥ 28 ॥
करुणा
दादू जाता देखिये, लाहा मूल गँवाइ ।
साहिब की गति अगम है, सो कुछ लखी न जाइ ॥ 29 ॥
सजीवन
साहिब मिलै तो जीविये, नहीं तो जीवै नांहि ।
भावै अनंत उपाय कर, दादू मूवों मांहि ॥ 30 ॥
सजीविन साधै नहीं, तातैं मर मर जाइ ।
दादू पीवै राम रस, सुख में रहै समाइ ॥ 31 ॥
दिन दिन लहुड़े होंहि सब, कहैं मोटा होता जाइ ।
दादू दिन दिन ते बढ़ें, जे रहैं राम ल्यौ लाइ ॥ 32 ॥
न जाणूं हाँजी, चुप गह, मेट अग्नि की झाल ।
सदा सजीवन सुमिरिये, दादू बंचै काल ॥ 33 ॥
जीवन मुक्ति
दादू जीवित छूटै देह गुण, जीवित मुक्ता होइ ।
जीवित काटै कर्म सब, मुक्ति कहावै सोइ ॥ 34 ॥
दादू जीवित ही दुस्तर तिरे, जीवित लंघे पार ।
जीवित पाया जगद्गुरु, दादू ज्ञान विचार ॥ 35 ॥
जीवित जगपति को मिलै, जीवित आत्मराम ।
जीवित दर्शन देखिये, दादू मन विश्राम ॥ 36 ॥
जीवित पाया प्रेम रस, जीवित पिया अघाइ ।
जीवित पाया स्वाद सुख, दादू रहे समाइ ॥ 37 ॥
जीवित भागे भ्रम सब, छूटे कर्म अनेक।
जीवित मुक्त सद्गति भये, दादू दर्शन एक ॥ 38 ॥

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