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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26
जीवित मेला ना भया, जीवित परस न होइ।
जीवित जगपति ना मिले, दादू बूड़े सोइ ॥ 39 ॥
जीवित दुस्तर ना तिरे, जीवित न लंघे पार।
जीवित निर्भय ना भये, दादू ते संसार ॥ 40 ॥
जीवित प्रकट ना भया, जीवित परिचय नांहि।
जीवित न पाया पीव को, बूड़े भवजल मांहि ॥ 41 ॥
जीवित पद पाया नहीं, जीवित मिले न जाइ।
जीवित जे छूटे नहीं, दादू गये विलाइ ॥ 42 ॥
दादू छूटे जीवतां, मूवाँ छूटे नांहि।
मूवाँ पीछे छूटिये, तो सब आये उस मांहि ॥ 43 ॥
मूवाँ पीछे मुक्ति बतावैं, मूवाँ पीछे मेला।
मूवाँ पीछे अमर अभय पद, दादू भूले गहिला ॥ 44 ॥
मूवाँ पीछे वैकुंठ वासा, मूवाँ स्वर्ग पठावैं।
मूवाँ पीछे मुक्ति बतावैं, दादू जग बोरावैं ॥ 45 ॥
मूवाँ पीछे पद पहुँचावैं, मूवाँ पीछे तारैं।
मूवाँ पीछे सद्गति होवै, दादू जीवित मारैं ॥ 46 ॥
मूवाँ पीछे भक्ति बतावैं, मूवाँ पीछे सेवा।
मूवाँ पीछे संयम राखैं, दादू दोजख देवा ॥ 47 ॥
सजीवन
दादू धरती क्या साधन किया, अंबर कौन अभ्यास ?
रवि शशि किस आरंभ तैं ? अमर भये निज दास ॥ 48 ॥
साहिब मारे ते मुये, कोई जीवै नांहि।
साहिब राखे ते रहे, दादू निज घर मांहि ॥ 49 ॥
जे जन राखे राम जी, अपने अंग लगाइ।
दादू कुछ व्यापै नहीं, जे कोटि काल झख जाइ ॥ 50 ॥

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