सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26
जीवन मरण
जीवित मिले सो जीवते, मूये मिल मर जाइ ।
दादू दोन्यों देखकर, जहाँ जानैं तहँ लाइ ॥ 16 ॥
सजीवन
दादू साधन सब किया, जब उनमन लागा मन ।
दादू सुस्थिर आत्मा, यों जुग जुग जीवैं जन ॥ 17 ॥
रहते सेती लाग रहु, तो अजरावर होइ ।
दादू देख विचार कर, जुदा न जीवै कोइ ॥ 18 ॥
जेती करणी काल की, तेती परिहर प्राण ।
दादू आतमराम सौं, जे तूं खरा सुजाण ॥ 19 ॥
विष अमृत घट में बसै, विरला जानै कोइ ।
जिन विष खाया ते मुये, अमर अमी सौं होइ ॥ 20 ॥
दादू सब ही मर रहे, जीवै नांही कोइ ।
सोई कहिये जीवता, जे कलि अजरावर होइ ॥ 21 ॥
देह रहै संसार में, जीव राम के पास ।
दादू कुछ व्यापै नहीं, काल झाल दुख त्रास ॥ 22 ॥
काया की संगति तजै, बैठा हरि पद मांहि ।
दादू निर्भय ह्वै रहै, कोई गुण व्यापै नांहि ॥ 23 ॥
दादू तज संसार सब, रहे निराला होइ ।
अविनाशी के आसरे, काल न लागे कोइ ॥ 24 ॥
जागहु लागहु राम सौं, रैन बिहानी जाइ ।
सुमिर सनेही आपणा, दादू काल न खाइ ॥ 25 ॥
दादू जागहु लागहु राम सौं, छाड़हु विषय विकार ।
जीवहु पीवहु राम रस, आतम साधन सार ॥ 26 ॥
मरै तो पावै पीव को, जीवत बंचै काल ।
दादू निर्भय नाम ले, दोनों हाथ दयाल ॥ 27 ॥
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