सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24
राखणहारा राम है, शिर ऊपर मेरे।
दादू केते पच गये, बैरी बहुतेरे ॥ 72 ॥
शूरातन विनती
दादू बल तुम्हारे बापजी, गिनत न राणा राव।
मीर मलिक प्रधान पति, तुम बिन सब ही बाव ॥ 73 ॥
दादू राखी राम पर, अपणी आप संवाह।
दूजा को देखूं नहीं, ज्यों जाणें त्यों निर्वाह ॥ 74 ॥
तुम बिन मेरे को नहीं, हमको राखणहार।
जे तूं राखै सांइयां, तो कोइ न सकै मार ॥ 75 ॥
सब जग छाड़ै हाथ तैं, तो तुम जनि छाड़हु राम।
नहिं कुछ कारज जगत सौं, तुमहीं सेती काम ॥ 76 ॥
शूरातन
दादू जाते जीव तैं तो डरूं, जे जीव मेरा होइ।
जिन यहु जीव उपाइया, सार करेगा सोइ ॥ 77 ॥
दादू जिन को सांई पाधरा, तिन बंका नांही कोइ।
सब जग रूठा क्या करै, राखणहारा सोइ ॥ 78 ॥
दादू साचा साहिब शिर ऊपरै, तती न लागै बाव।
चरण कमल की छाया रहै, किया बहुत पसाव ॥ 79 ॥
विनती
दादू कहै-जे तूं राखै सांइयां, तो मार सकै ना कोइ।
बाल न बांका कर सकै, जे जग बैरी होइ ॥ 80 ॥
दादू राखणहारा राखै, तिसे कौन मारै।
उसे कौन डुबोवे, जिसे सांई तारै ॥
बाकी कौन बिगारै, जाकी आप सुधारै।
कहै दादू सो कबहूँ न हारै, जे जन सांई संभारै ॥ 81 ॥
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