सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24
दादू मरणे थीं तूं मत डरै, मरणा आज कि काल ।
मरणा मरणा क्या करै, बेगा राम सँभाल ॥ 49 ॥
दादू मरणा खूब है,निपट बुरा व्यभिचार ।
दादू पति को छाड़ कर, आन भजै भरतार ॥ 50 ॥
दादू तन तैं कहाँ डराइये, जे विनश जाइ पल बार ।
कायर हुआ न छूटिये, रे मन हो हुसियार ॥ 51 ॥
दादू मरणा खूब है, मर माहीं मिल जाइ ।
साहिब का संग छाड़ कर, कौन सहै दुख आइ ॥ 52 ॥
दादू माहीं मन सौं जूझ कर, ऐसा शूरा वीर ।
इंद्रिय अरि दल भान सब, यों कलि हुआ कबीर ॥ 53 ॥
सांई कारण शीश दे, तन मन सकल शरीर ।
दादू प्राणी पंच दे, यों हरि मिल्या कबीर ॥ 54 ॥
सबै कसौटी शिर सहै, सेवक सांई काज ।
दादू जीवन क्यों तजै, भाजे हरि को लाज ॥ 55 ॥
सांई कारण सब तजै, जन का ऐसा भाव ।
दादू राम न छाड़िये, भावै तन मन जाव ॥ 56 ॥
पतिव्रत निष्काम
दादू सेवक सो भला, सेवै तन मन लाइ ।
दादू साहिब छाड़ कर, काहू संग न जाइ ॥ 57 ॥
पतिव्रता निज पीव को, सेवै दिन अरु रात ।
दादू पति को छाड़ कर, काहू संग न जात ॥ 58 ॥
शूरातन
दादू मरबो एक जु बार, अमर झुकेड़े मारिये ।
तो तिरिये संसार, आतम कारज सारिये ॥ 59 ॥
दादू जे तूं प्यासा प्रेम का, तो जीवन की क्या आस ।
शिर के साटे पाइये, तो भर भर पीवै दास ॥ 60 ॥
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