सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24
जे निकसे संसार तैं, सांई की दिशि धाइ।
जे कबहुँ दादू बाहुड़े, तो पीछे माऱ्या जाइ ॥ 26 ॥
दादू कोई पीछे हेला जनि करै, आगे हेला आव।
आगे एक अनूप है, नहिं पीछे का भाव ॥ 27 ॥
पीछे को पग ना भरै, आगे को पग देइ।
दादू यहु मत शूर का, अगम ठौर को लेइ ॥ 28 ॥
आगा चल पीछा फिरै, ताका मुँह मा दीठ।
दादू देखे दोइ दल, भागे देकर पीठ ॥ 29 ॥
दादू मरणां माँड कर, रहै नहिं ल्यौ लाइ।
कायर भाजै जीव ले, आ-रण छाड़ै जाइ ॥ 30 ॥
शूरा होइ सु मेर उलंधै, सब गुण बँध्या छूटै।
दादू निर्भय ह्वै रहे, कायर तिणा न टूटै ॥ 31 ॥
शूर सती साधु निर्णय
सर्प केसरी काल कुंजर, बहु जोध मारग मांहि।
कोटि में कोई एक ऐसा, मरण आसंघ जाहि ॥ 32 ॥
दादू जब जागै तब मारिये, वैरी जिय के साल।
मनसा डायनि, काम रिपु, क्रोध महाबली काल ॥ 33 ॥
पंच चोर चितवत रहैं, माया मोह विष झाल।
चेतन पहरै आपने, कर गह खड़ग संभाल ॥ 34 ॥
काया कबज कमान कर, सार शब्द कर तीर।
दादू यहु सर सांध कर, मारै मोटे मीर ॥ 35 ॥
काया कठिन कमान है, खांचै विरला कोइ।
मारै पंचों मृगला, दादू शूरा सोइ ॥ 36 ॥
जे हरि कोप करै इन ऊपर, तो काम कटक दल जांहि कहाँ।
लालच लोभ क्रोध कत भाजैं, प्रगट रहे हरि जहाँ तहाँ ॥ 37 ॥
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