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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 241, कुल 504 में से

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पृष्ठ 241

श्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24
कायर काम न आवही, यहु शूरे का खेत।
तन मन सौंपै राम को, दादू शीश सहेत ॥ 15 ॥
जब लग लालच जीव का, तब लग निर्भय हुआ न जाइ।
काया माया मन तजै, तब चौड़े रहै बजाइ ॥ 16 ॥
दादू चौड़े में आनन्द है, नाम धज्या रणजीत।
साहिब अपना कर लिया, अन्तरगत की प्रीति ॥ 17 ॥
दादू जे तुझ काम करीम सौं, तो चौहट चढ़ कर नाच।
झूठा है सो जाइगा, निहचै रहसी साच ॥ 18 ॥
जीवत मृतक
राम कहेगा एक को, जे जीवित-मृतक होइ।
दादू ढूंढे पाइये, कोटि मध्ये कोइ ॥ 19 ॥
शूर सती साध निर्णय
शूरा पूरा संत जन, सांई को सेवै।
दादू साहिब कारणै, सिर अपना देवै ॥ 20 ॥
शूरा जूझै खेत में, सांई सन्मुख आइ।
शूरे को सांई मिले, तब दादू काल न खाइ ॥ 21 ॥
मरबे ऊपरि एक पग, कर्ता करै सो होहि।
दादू साहिब कारणै, तालाबेली मोहि ॥ 22 ॥
हरि भरोसा
दादू अंग न खैंचिये, कहि समझाऊँ तोहि।
मोहि भरोसा राम का, बंका बाल न होहि ॥ 23 ॥
बहुत गया थोड़ा रह्या, अब जीव सोच निवार।
दादू मरणा मांड रहु, साहिब के दरबार ॥ 24 ॥
शूरवीर कायर
जीवों का संशय पड़या, को काको तारै।
दादू सोई शूरमा, जे आप उबारै ॥ 25 ॥

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