सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 218, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19
विपति भली हरि नाम सौं, काया कसौटी दुख ।
राम बिना किस काम का, दादू संपति सुख ॥ 41 ॥
विश्वास संतोष
दादू एक बेसास बिन, जियरा डावांडोल ।
निकट निधि दुःख पाइये, चिंतामणि अमोल ॥ 42 ॥
दादू बिन बेसासी जीयरा, चंचल नांही ठौर ।
निश्चय निश्चल ना रहे, कछू और की और ॥ 43 ॥
दादू होना था सो है रह्या, स्वर्ग न बांछी धाइ ।
नरक कनै थी ना डरी, हुआ सो होसी आइ ॥ 44 ॥
दादू होना था सो है रह्या, जनि बांछे सुख दुःख ।
सुख मांगे दुख आइसी, पै पीव न बिसारी मुख ॥ 45 ॥
दादू होना था सो है रह्या, जे कुछ किया पीव ।
पल बधै न छिन घटै, ऐसी जानी जीव ॥ 46 ॥
दादू होना था सो है रह्या, और न होवै आइ ।
लेना था सो ले रह्या, और न लिया जाइ ॥ 47 ॥
ज्यों रचिया त्यों होइगा, काहे को सिर लेह ।
साहिब ऊपरि राखिये, देख तमाशा येह ॥ 48 ॥
पतिव्रता निष्काम
ज्यों जाणों त्यों राखियो, तुम सिर डाली राइ ।
दूजा को देखूं नहीं, दादू अनत न जाइ ॥ 49 ॥
ज्यों तुम भावै त्यों खुसी, हम राजी उस बात ।
दादू के दिल सिदक सौं, भावै दिन को रात ॥ 50 ॥
दादू करणहार जे कुछ किया, सो बुरा न कहना जाइ ।
सोई सेवक संत जन, रहबा राम रजाइ ॥ 51 ॥
- 218 -